Whatsappdude Pain Status | Urdu शायरी Hindi | तरक्की पसंद शायरी

Whatsappdude Pain Status | Urdu शायरी Hindi | तरक्की पसंद शायरी 1Whatsappdude Pain Status | Urdu शायरी Hindi | तरक्की पसंद शायरीWhatsappdude Pain Status | Urdu शायरी Hindi | तरक्की पसंद शायरी 2

Whatsappdude Pain Status | Urdu शायरी Hindi | तरक्की पसंद शायरी तरक्की पसंद शायरी के दौर में जिस एक शायर ने अस्ल लहजे को बजिद नहीं छोड़ा और तमाम उम्र ग़ज़ल की नाज़ुक मिज़ाजी से मुतासिर रहे जनाब अहमद फराज़ साहब शायरी में उसी शख़्सियत का नाम है।

Whatsappdude Pain Status | Urdu शायरी Hindi | तरक्की पसंद शायरी

फराज़ साहब की शख़्सियत से जुड़ी हुई एक अहम बात ये भी है कि वो अपने दौर के सबसे मक़बूल शायरों में से थे। मशहूर हो चुकी उनकी ग़ज़लों के इन शेरों से आप वाकिफ़ होंगे।

मैं तो बस उनके कुछ चुनिंदा दर्द भरे आशारो को लेकर एक कोशिश कर रहा हू ताकि एक बार फिर से फराज़ साहब को ज़हनो मे ज़िंदा किया जा सके।

अब और क्या किसी से मरासिम बढ़ाएँ हम ये भी बहुत है तुझ को अगर भूल जाएँ हम हिंद-पाक के मुशायरों में जितनी मुहब्बतों और दिलचस्पी के साथ फराज़ साहब को सुना गया है उतना शायद ही किसी और शायर को सुना गया हो।

Whatsappdude Pain Status | Urdu शायरी Hindi | तरक्की पसंद शायरी 1Whatsappdude Pain Status | Urdu शायरी Hindi | तरक्की पसंद शायरीWhatsappdude Pain Status | Urdu शायरी Hindi | तरक्की पसंद शायरी 2

Whatsappdude Pain Status | Urdu शायरी Hindi | तरक्की पसंद शायरी
Whatsappdude Pain Status | Urdu शायरी Hindi | तरक्की पसंद शायरी

आँख से दूर न हो दिल से उतर जाएगा वक़्त का क्या है गुज़रता है गुज़र जाएगा फराज़ साहब ने उर्दू शायरी को एक बहुत नर्म और नाज़ुक अहसास अता की और ग़ज़ल जिसका मतलब ही माशूका से गुफ़्तगू करना होता है उसे नए अंदाज़ दिए।

दिल भी पागल है कि उस शख़्स से वाबस्ता है जो किसी और का होने दे न अपना रक्खे फराज़ साहब ने इश्क़, मुहब्बत और महबूब से जुड़े हुए ऐसे बारीक एहसासात को शायरी की ज़बान दी है जो अर्से पहले तक अनछुए थे।

ख्वाब, जुदाई, फूल और किताबो की मुलाकात इस शेर में आप भी ग़ौर फरमाये।

अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें ग़म-ए-दुनिया भी ग़म-ए-यार में शामिल कर लो नशा बढ़ता है शराबें जो शराबों में मिलें शेर कहने का यह अंदाज फराज़ साहब की ज़ाती ख़ासियत थी।

उनकी तमाम ग़ज़लों में उनका ये अंदाज अलग-अलग तरीके से सामने आता है और बिल्कुल नई अदबी फसल पैदा करता है।

दिल की कैफियत को दिल से समझने वाले हर दिल अजीज शायर अहमद फराज़ ने इस शेर में दर्द का ज़िक्र कितनी ख़ूबसूरती से पेश किया है आइये मुलायज़ा फरमाये… अब तेरा ज़िक्र भी शायद ही ग़ज़ल में आए और से और हुए दर्द के उनवाँ जानाँ फराज़ साहब के कलाम में ग़म और दर्द बरबस झलकता है। तवज्जो दीजिये और दिल से अहसास भी कीजिये।

Whatsappdude Pain Status | Urdu शायरी Hindi | तरक्की पसंद शायरी 1Whatsappdude Pain Status | Urdu शायरी Hindi | तरक्की पसंद शायरीWhatsappdude Pain Status | Urdu शायरी Hindi | तरक्की पसंद शायरी 2

हुआ है तुझ से बिछड़ने के बाद ये मालूम कि तू नहीं था तेरे साथ एक दुनिया थी दर्द को लफ्ज़ो में बयान करने का हुनर ये लहजा और ये मिज़ाज जनाब अहमद फराज़ साहब की खासियत है। उनका यह शेर उन की आरज़ू की तरजुमानी करता है।

अब तो ये आरज़ू है कि वो ज़ख़्म खाइए ता-ज़िंदगी ये दिल न कोई आरज़ू करे अगला शेर फराज़ साहब की बहुत मकबूल ग़ज़ल से है।

ये शेर मैं नज़र कर रहा हूँ अपने छोटे भाई जनाब शीराज़ दानिश साहब को जो शहर देवबंद से ताल्लुक रखते है और बहुत दिनों से हम से मिले नहीं है।

मुलायज़ा फरमाये और फराज़ साहब को अपने दुआओ में याद रखिये रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ अब तक दिल-ए-ख़ुश-फ़हम को तुझ से हैं उम्मीदें ये आख़िरी शमएँ भी बुझाने के लिए आ हक़ीक़तन फराज़ साहब का ये अंदाज़ आशिक को मोहब्बत का वो सलीका सिखाता है ताकि वो

मोहब्बत की राह में हमेशा गुलशन की तरह महकता रहे… और क्या खूबसूरत अंदाज़ में ग़ज़ल गाई है ग़ज़लों के बादशाह गुलुकार मेहंदी हसन साहब ने अल्लाह उनकी

मग़फ़िरत फ़रमाये ऐसा जैसे किसी ने लफ्ज़ो को रवानी दे दी हो ज़िंदाबाद, मेहंदी हसन साहब ज़िंदाबाद मता-ऐ-इश्क़ से दूर रहने वाला शख्स भी इनके आशारो में छिपे दर्द

को आसानी से समझ और महसूस कर सकता है जिसकी ज़िंदा मिसाल इस शेर में देखने को मिलती है। इस ज़िंदगी में इतनी फ़राग़त किसे नसीब इतना न याद आ कि तुझे

भूल जाएँ हम वैसे तो शायरी में बेवफ़ाई को ख़ास अंदाज़ में एक रूमानी दर्जा भी हासिल है। फराज़ के यहां भी बेवफाई की ये रुमानियत अपने पूरे शबाब में दिखती है |

मिसाल की तौर पे… इक ये भी तो अंदाज़-ए-इलाज-ए-ग़म-ए-जाँ है ऐ चारागरो दर्द बढ़ा क्यूँ नहीं देते जनाब फराज़ साहब की बेहतरीन शायरी की एक और जिन्दा मिसाल,

आप लोगो की नज़र करता हूँ क्या कहें कितने मरासिम थे हमारे उस से वो जो इक शख़्स है मुँह फेर के जाने वाला फराज़ साहब की शायरी में घुमा-फिराकर बात करने की जगह नहीं है|

आप मुलायज़ा फरमाये… सब ख़्वाहिशें पूरी हो ‘फराज़’ ऐसा नहीं है जैसे कई आशार मुकम्मल नहीं होते वक़्त के साथ साथ जैसे जैसे फराज़ अपने खूबसूरत कलाम के साथ सामने आते गए तो लोगों को उनसे उम्मीदें भी बढ़ने लगी।

ख़ुशी इस बात की हैं कि फराज़ ने उन्हे कभी मायूस भी नहीं किया। ग़ौर कीजियेगा… के सिलसिले तोड़ गया वो सभी जाते जाते वर्ना इतने तो मरासिम थे कि आते जाते जिस इश्क़ को फराज़ साहब दिल की गहराई में ढूंढ़ने का ज़ुनून रखते थे कभी कभी दर्द की तन्हाइओ में भी तलाश लेते थे।

इस से पहले कि बेवफ़ा हो जाएँ क्यूँ न ऐ दोस्त हम जुदा हो जाएँ हक़ीक़त तो ये हैं कि फराज़ साहब एक ऐसी शख्सियत हैं जिन्हे चंद लफ्ज़ो में बयान करना नामुमकिन हैं।

बेशक़ फराज़ साहब ने ग़ज़ल को कुछ ऐसे अंदाज़ में पेश किया के वो लोगो के दिलो की धड़कन बन गई और ज़माने का हाल बताने के लिए आईना बन गई।

पढ़िए, फराज़ साहब को आप को बहुत सारे रंग और खुश्बुऐ मिलेंगी उन के कलाम में। कभी ‘फराज़’ से आ कर मिलो जो वक़्त मिले ये शख़्स ख़ूब है आशार के अलावा भी आखिर में हमारी आपसे ये गुज़ारिश हैं के आप ज्यादा से ज्यादा इस वीडियो को लाइक और शेयर करके हमारी भी हौसला अफ़ज़ाई फरमाये और चैनल को सब्सक्राइब करके अपने प्यार का इज़हार करे।

Whatsappdude Pain Status | Urdu शायरी Hindi | तरक्की पसंद शायरी 1Whatsappdude Pain Status | Urdu शायरी Hindi | तरक्की पसंद शायरीWhatsappdude Pain Status | Urdu शायरी Hindi | तरक्की पसंद शायरी 2

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *